ख़ुदा से होड़ करने पर तुला है
बशर इस दौर का इक चुटकुला है
समझ आता नहीं किरदार उसका
कभी अक्खड़ कभी वो चुलबुला है
कभी भी जाईए फ़रियाद लेकर
फ़कीरों का हमेशा दर खुला है
जो सुख- दुःख को बराबर तोलती हो
हमारी ज़िन्दगी ऐसी तुला है
परिंदे आज कितने खुश हैं देखो
कई दिन बाद ये मौसम खुला है
कवि दीपक गुप्ता
+91 9811153282
www.kavideepakgupta.com
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